डोंगरगढ़ शहर के बीचो-बीच बुधवारी पारा स्थित पुराने अस्पताल परिसर का माहौल इन दिनों सवालों के घेरे में है। जहां एक ओर शहरी क्षेत्रवासियों की सुविधा के लिए ओपीडी संचालित की जा रही है, वहीं दूसरी ओर परिसर में नशेड़ियों की मौजूदगी चिंता का कारण बनती जा रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्पताल कैंपस में जगह-जगह शराब की बोतलें, डिस्पोजल, पानी पाउच और अन्य मादक पदार्थों के अवशेष लगातार देखने को मिल रहे हैं। शाम होते ही परिसर कथित रूप से नशेड़ियों का अड्डा बन जाता है, जिससे मरीजों, कर्मचारियों और आसपास रहने वाले परिवारों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में ओपीडी के खिड़की में रखी शराब की खाली बोतल इस बात का प्रमाण है कि शराबियों का किस तरह से आतंक है वही ओपीडी के दरवाजे के ठीक सामने में भी पड़ा हुआ है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं की अंदरूनी भाग में क्या स्थिति होगी।

गौरतलब है कि इसी परिसर में पूर्व से आयुर्वेदिक औषधालय और होम्योपैथिक औषधालय भी संचालित हैं। साथ ही अस्पताल कर्मचारियों के आवास और उनके परिवार भी यहीं निवास करते हैं। ऐसे में परिसर का बिगड़ता वातावरण सुरक्षा और सामाजिक दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र के वार्ड पार्षद और संबंधित जिम्मेदारों द्वारा अब तक ठोस पहल नहीं दिखी है। वहीं, पुलिस की नियमित चहल-कदमी के बावजूद नशेड़ियों की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना चुनौती बना हुआ है।
शहरवासियों ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, नियमित निगरानी बढ़ाई जाए और परिसर को नशे से मुक्त रखने के लिए सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कभी चहल-पहल से भरा यह स्थान अब अनुशासन और सुरक्षा की अपेक्षा कर रहा है।
